गर्भधारण करने के लिए कौन सी दवा लेनी चाहिए?HealthPlanet

Posted on Fri 14th Oct 2022 : 09:07

बांझपन में दवा नहीं कर रही काम तो अपनाएं ये 8 घरेलू नुस्खे (PICS)

एक वर्ष तक नियमित सम्भोग करने वाली महिला अगर गर्भधारण करने में असमर्थ हो तो वह बांझपन से जुड़ी समस्या का शिकार होती हैं।

एक वर्ष तक नियमित सम्भोग करने वाली महिला अगर गर्भधारण करने में असमर्थ हो तो वह बांझपन से जुड़ी समस्या का शिकार होती हैं। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, गर्भावस्था बनाए रखने और जीवित बच्चे को जन्म न दे पाना भी बांझपन में ही सम्मिलित होता हैं। स्त्रियों में प्रजनन क्षमता के प्रभावित होने के कारण कई स्वास्थय संबंधी समस्याएं हो सकती है जैसे :- पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओ), ऐंडोमेटरिओसिज़, श्रोणि सूजन की बीमारी, गर्भाशय फाइब्रॉएड, एनीमिया, थायराइड की समस्याएं, अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूबज़, कैंडिडा और यौन संचारित रोग (एसटीडी) इत्यादि ।

इसी के साथ शराब, सिगरेट, मोटापा, तनाव, अनियमित एवं दर्दपूर्ण माहवारी की समस्या, पोषण-रहित भोजन या फिर अत्यधिक शारीरिक-प्रशिक्षण भी स्त्री की गर्भ-धारण क्षमता को प्रभावित करते हैं। यह समस्या 35वर्ष से ज्यादा उम्र की महिला को ज्यादा होती हैं।

वैसे तो बढ़ती टैक्नोलॉजी के बीच महिलाएं इन-विट्रो-फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) या सरोगेट-मां के माध्यम से बच्चा प्राप्त करने में सफल रही हैं लेकिन हर किसी के लिए यही तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि महंगी होने के कारण यह हर एक की पहुंच में नहीं हैं लेकिन कुछ प्राकृतिक और हर्बल उपचार भी बांझपन से लड़ने और गर्भवती होने की संभावनाओं को बढ़ाने में मददगार हैं।

1. अश्वगंधा- अश्वगंधा हार्मोनल-संतुलन बनाए रखती है और प्रजनन क्षमता को बढ़ाती है। यह गर्भाश्य को समुचित आकार में लाकर उसे स्वस्थ बनाने में मदद करती है।

सेवनः इसके लिए गर्म पानी के एक गिलास में अश्वगंधा चूर्ण का 1 चम्मच मिश्रण बनाकर, दिन में 2 बार लें ।

2. अनार - अनार गर्भाश्य में खून के प्रवाह को तेज करता है और गर्भाश्य की दीवारों को मोटा कर के गर्भपात की संभावना को कम करने के लिए सहायक है। यह भ्रूण के स्वस्थ विकास को बढ़ावा देता है ।

सेवनः अनार के बीज और छाल को बराबर मात्रा में मिलाकर इसका चूर्ण बना लें और किसी एयर टाइट जार में रख लें। कुछ हफ्तों के लिए दिन में 2 बार गर्म पानी के एक गिलास के साथ इस मिश्रण का आधा चम्मच लें। आप ताजा अनार-फल भी खा सकते हैं, और अनार का ताज़ा रस भी पी सकते हैं।

3. दालचीनी- दालचीनी डिम्ब-ग्रंथि के सही रूप से कार्य करने में मदद कर सकती है।

सेवनः गर्म पानी के एक कप में, दालचीनी पाउडर का 1 चम्मच मिलाएं । कुछ महीनों के लिए दिन में एक बार इसे पीते रहें । इसके अलावा, अपने अनाज, दलिया, और दही पर भी दालचीनी पाउडर का छिड़काव करके इसे अपने आहार में शामिल करें। ध्यान रहे कि इस मसाले का प्रयोग एक दिन में 2 चम्मच से अधिक ना करें।

4. खजूर- यह गर्भ धारण करने के लिए, आपकी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसमें कई पोषक तत्व होते हैं, जैसे कि:- विटामिन ए, ई और बी लोहा और अन्य ज़रूरी खनिज, जोकि एक महिला को गर्भ धारण करने के लिए और गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म तक आवश्यक हैं।

सेवनः 2 बड़े चम्मच कटे हुए धनिए की जड़ के साथ 10 से 12 खजूर (बीज के बिना) पीस लें। पेस्ट बनाने के लिए गाय के दूध के ¾ कप मिलाएं और इसे उबाल लें। इसे पीने से पहले ठंडा होने दें। अपनी अंतिम माहवारी की तारीख से, एक सप्ताह के लिए, इसे दिन में एक बार पीएं। एक स्वस्थ-नाश्ते के रूप में प्रतिदिन 6-8 खजूर खाते रहें और दूध, दही और स्वास्थ्य-पेय में भी कटे हुए खजूर का समावेश करें।

5. विटामिन-डी - प्रैग्नेंसी और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए विटामिन डी बहुत ही आवश्यक है। वास्तव में विटामिन डी की कमी से बांझपन और गर्भपात का कारण हो सकता है।

सेवनः विटामिन डी के लिए भोजन जैसे कि सामन पनीर, अंडे की जर्दी ले सकती हैं। आप विटामिन डी की गोलियों का सेवन भी कर सकती हैं लेकिनगोलियों कासेवन करने के लिए डाक्टर से सलाह जरूर ले लें।

6. बरगद के वृक्ष की जडें- आयुर्वेद की मानें तो बरगद के पेड़ की जड़े बांझपन के इलाज में प्रभावी होती हैं।

सेवनः इसके लिए कुछ दिनों के लिए धूप में एक बरगड के पेड़ की कोमल जड़ों को सुखा लें, फिर इसका चूर्ण बनाक एक बंद डिब्बे में रख लें। एक गिलास दूध में चूर्ण के 1 से 2 बड़े चम्मच मिलाए। माहवारी का समय खत्म होने के बाद लगातार तीन-रातों के लिए, खाली पेट इसे एक बार पीएं। इसे पीने के बाद एक घंटे के लिए कुछ भी खाने से बचें । कुछ महीनों के लिए इस उपाय का पालन करें। याद रखें कि अपने मासिक धर्म चक्र के दौरान इस उपायों का प्रयोग न करें।

7. योग- प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने में मदद हेतु कुछ योगासन है जैसे कि :- नाड़ी- शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, पश्चिमोत्तानासन, हस्तपादासन, जानू शीर्षासन, बाधा कोनासना, विपरीत-करणी और योग निद्रा इत्यादि । याद रखें, योग का लाभ लेने के लिए इसे ठीक-प्रकार से किया जाना चाहिए।

8. संतुलित आहार- एक अच्छी तरह से संतुलित आहार लेना, प्रजनन क्षमता में सुधार के लिए एक और महत्वपूर्ण कारक है। एक स्वस्थ, संतुलित आहार स्वास्थ्य की उस दशा या बीमारियों को रोकने में मदद करता है जो बाँझपन का कारण हो सकती हैं।

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